शेखर सुमन ने बॉलीवुड के उस शक्तिशाली गैंग के बारे में बताया, जो दूसरों को जूठन देता है

शेखर सुमन ने बॉलीवुड के उस शक्तिशाली गैंग के बारे में बताया, जो दूसरों को जूठन देता है



एक्टर शेखर सुमन. सुशांत सिंह राजपूत के लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर उन्होंने हैशटैग जस्टिस फॉर सुशांत फोरम (#justiceforSushantforum) भी शुरू किया है. उनके मुताबिक, सुशांत ने सुसाइड नहीं किया है. वो इस केस की CBI जांच की मांग कर रहे हैं.
पिछले कुछ दिनों से शेखर लगातार इस मामले पर बोल रहे हैं. यहां तक पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद भी उन्होंने ट्वीट कर दोबारा जांच की मांग की. लिखा,
‘तो ये डिक्लेयर कर दिया गया है कि सुशांत की मौत सुसाइड है. इस पर विश्वास मत करना. मुझे लग ही रहा था कि ऐसा ही होगा. ये नैरेटिव पहले से ही सेट था. इसलिए अब फोरम और भी ज्यादा अहम हो गई है. दोबारा जांच के लिए अपनी आवाज़ ऊंची करें. हम अब योद्धा की तरह स्टैंड लेना होगा और सुसाइड के नैरेटिव के आगे झुंकना नहीं है. इस बार हम नहीं सुनेंगे. इस बार हम आश्वस्त नहीं होंगे.’
इसके अलावा शेखर ने NBT को दिए एक इंटरव्यू में भी अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा,
‘ये सवाल है कि ये जो सुसाइड हुआ है, कहीं वो मर्डर तो नहीं? मेरे अलावा बहुतों के मन में ये सवाल है. मौत से पहले सुशांत पार्टी कर रहे थे, प्लेस्टेशन खेल रहे थे, जूस पी रहे थे, वो अचानक सुसाइड कैसे कर सकते हैं? ऐसा नैरेटिव सेट किया जा रहा है और बताया जा रहा है कि सुशांत ने सुसाइड ही किया है, ये सही नहीं है. पहले भी कई मामलों में ऐसा हो चुका है, जांच में पहले सुसाइड की बात निकलती है, लेकिन बाद में मामला कुछ और ही सामने आता है. इसलिए सुशांत के केस की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए.’
सुशांत की मौत के बाद से ही बॉलीवुड में फैले नेपोटिज़म पर जमकर बहस हो रही है. इस पर शेखर ने इंटरव्यू में कहा,
‘नेपोटिज़म भाई-भतीजावाद को कहते हैं. इंडस्ट्री में नेपोटिज़म नहीं है. और अगर है भी तो बहुत छोटे लेवल पर है, जो हर इंडस्ट्री में होती है. यहां गैंगिज़म है. जैसे माफिया अंडरवर्ल्ड का गैंग होता था, वैसा गैंग है. चंद लोगों ने पूरी इंडस्ट्री पर कब्ज़ा करके रखा है, हथिया लिया है. उनके कहे बिना कोई पत्ता भी नहीं हिलता. फिर चाहे फिल्म बनानी हो, किसी प्रोडक्शन हाउस में कास्टिंग हो, फिल्म के म्यूज़िक डायरेक्टर, सिंगर्स कौन होंगे, फिर फिल्म के रिलीज़ होते वक्त सारे थियेटर्स में कब्ज़ा कर लेना, बाकियों को जूठन देना, ये सब उनका काम है.’
इसके आगे शेखर ने कहा कि ये गैंग बाहरी लोगों को भी अपने हिसाब से काम करने पर मजबूर करता है, जो मान गया तो ठीक, जो नहीं माना उसका करियर खत्म कर दिया जाता है, प्रोजेक्ट्स छीन लिए जाते हैं. आगे शेखर ने कहा,


‘सुशांत के साथ भी ऐसा हुआ. उसके हाथ से अचानक छह-सात फिल्में निकल गईं. वो भले ही ये कहे कि उसे फर्क नहीं पड़ता, लेकिन फर्क पड़ता है. उसका इंडस्ट्री में पहले से कोई तो था नहीं. उसे ‘काय पो छे’ फिल्म के लिए बेस्ट डेब्यू का अवॉर्ड भी नहीं मिला. ‘छिछोरे’ को भी कोई अवॉर्ड नहीं. ये गैंग तो पहले ही तय कर लेता है कि किसे अवॉर्ड दिया जाना है.’
‘मेरे से भी फिल्में छीनी गई’
जब शेखर से पूछा गया कि उन्होंने ये फ़ोरम शुरू किया है, तो उन्हें डर नहीं लग रहा क्या? जवाब में उन्होंने कहा,
‘मुझे डर नहीं है. इस माफिया ने बहुत कोशिश की, मुझे रोका गया, मेरी फिल्में छीनी गईं, जगह से हटाया गया. इसका असर मेरे बेटे अध्ययन पर भी हुआ. लेकिन हमें लड़ते रहना है.’


ये सारी बातें शेखर ने अपने इस इंटरव्यू में कही. वो यही मांग कर रहे हैं कि सुशांत के केस की ठीक से जांच हो. क्योंकि उन्हें नहीं लगता कि सुशांत ने सुसाइड किया और अगर सुसाइड किया भी तो किसने ऐसा करने के लिए उसे उकसाया. ये सब पता लगाया जाए.
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